
फर्रुखाबाद, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट – आलू किसान आंदोलन के प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के दिनांक 20 अगस्त 2026 के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने आलू निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी तो दी है, लेकिन आलू उत्पादक किसानों की सबसे बड़ी समस्या—उपज का लाभकारी मूल्य न मिलना—आज भी समाधान की प्रतीक्षा कर रही है।
अशोक कटियार ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय में 7 मई 2026 को दर्ज शिकायत के जवाब में मंत्रालय के पत्र के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से लगभग 4.22 लाख मीट्रिक टन आलू का निर्यात हुआ तथा निर्यात का मूल्य लगभग 84.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया है। पत्र में APEDA द्वारा किसानों के प्रशिक्षण, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार आलू निर्यात बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है, तो आलू उत्पादक किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए ठोस व्यवस्था कब बनाई जाएगी? निर्यात बढ़ाने की योजनाओं का वास्तविक लाभ खेत में आलू पैदा करने वाले किसान तक पहुंचना चाहिए, न कि केवल निर्यात के आंकड़ों तक सीमित रहना चाहिए।
आलू किसानों की प्रमुख मांगें
अशोक कटियार ने केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं—
1. राष्ट्रीय आलू नीति बनाई जाए। आलू की खेती, उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को एकीकृत करने के लिए स्पष्ट राष्ट्रीय आलू नीति लागू की जाए, ताकि किसानों को बार-बार बाजार संकट का सामना न करना पड़े।
2. आलू का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो। आलू की बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी, खुदाई, ढुलाई और भंडारण सहित वास्तविक उत्पादन लागत का आकलन करके किसानों को उचित मूल्य दिलाने की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
3. आलू की सरकारी खरीद शुरू हो। चिप्सोना एवं अन्य उपयुक्त प्रसंस्करण योग्य किस्मों के आलू की सरकारी खरीद की व्यवस्था की जाए। किसानों की उपज के लिए घोषित खरीद केंद्र, पारदर्शी गुणवत्ता मानक और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
4. कोल्ड स्टोरेज में राहत मिले। आलू किसानों पर बढ़ते भंडारण और ढुलाई खर्च का बोझ कम किया जाए। निजी शीतगृहों में आलू रखने वाले किसानों को नियमों के अनुरूप राहत उपलब्ध कराई जाए तथा भंडारण शुल्क और संबंधित खर्चों के संबंध में पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
5. आलू भाड़ा अनुदान का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो। सरकार स्पष्ट करे कि आलू भाड़ा अनुदान योजना के अंतर्गत कितनी धनराशि स्वीकृत हुई, कितनी जारी की गई, कितने किसानों को भुगतान मिला और कितने आवेदन अभी लंबित हैं। जनपदवार तथा वर्षवार भुगतान विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसानों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
6. आलू निर्यात संबंधी बाधाएं दूर हों। निर्यात बाजारों की पहचान, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, परिवहन और निर्यात प्रक्रिया में किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों को सहायता दी जाए। निर्यात संबंधी नीतियां ऐसी हों कि उनका लाभ वास्तविक उत्पादकों तक पहुंचे और किसानों को बाजार मिलने में अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े।
7. उत्तर प्रदेश में आलू विपणन एवं निर्यात केंद्र स्थापित हो। फर्रुखाबाद की सातनपुर मंडी में आधुनिक आलू व्यापार एवं निर्यात केंद्र विकसित किया जाए, जहां गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और खरीदारों से संपर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों।
8. किसानों को बाजार की सही जानकारी मिले। प्रमुख आलू उत्पादक जिलों की मंडियों में आवक, किस्मवार भाव, शीतगृहों की उपलब्धता, सरकारी योजनाओं और निर्यात की मांग से संबंधित जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक की जाए।
निर्यात के आंकड़ों के साथ किसान की आमदनी पर भी जवाब दे सरकार
अशोक कटियार ने कहा कि आलू निर्यात बढ़ाना उपयोगी हो सकता है, लेकिन निर्यात में वृद्धि का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि प्रत्येक आलू किसान को लाभकारी मूल्य भी मिल रहा है। किसानों की वास्तविक स्थिति का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उन्हें अपनी उपज का कितना मूल्य मिला, उत्पादन एवं भंडारण पर कितना खर्च आया और खेती से कितनी आमदनी बची।
उन्होंने कहा कि आलू किसान कई बार लागत से कम कीमत पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को केवल निर्यात बढ़ने की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि निर्यात को बढ़ावा देने की योजनाओं से छोटे और मध्यम आलू उत्पादकों को कितना प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आलू किसानों के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करने के साथ-साथ वर्तमान विपणन संकट से निपटने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना घोषित की जाए।
किसान हित में जवाबदेही तय हो
अशोक कटियार ने कहा कि आलू किसान आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए चलाया जा रहा है। आंदोलन का उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य, सरकारी खरीद, भंडारण में राहत, निर्यात के बेहतर अवसर और सम्मानजनक आय दिलाना है।
उन्होंने कहा कि आलू किसान देश की खाद्य आपूर्ति और कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए उनकी समस्याओं को केवल बाजार के उतार-चढ़ाव पर छोड़ना उचित नहीं है। केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार को किसानों, किसान संगठनों, शीतगृह संचालकों, प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
अशोक कटियार ने स्पष्ट कहा कि आलू नीति बनाओ, मरता हुआ किसान बचाओ। सरकार निर्यात के आंकड़ों के साथ आलू किसान की आमदनी, सरकारी खरीद और भाड़ा अनुदान का पूरा हिसाब भी सार्वजनिक करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आलू किसानों की समस्याओं पर ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो आलू किसान आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से किसानों की आवाज उठाता रहेगा।


