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जे एस ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

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फर्रुखाबाद, आरोही टुडे न्यूज, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जिला फर्रुखाबाद एवं आकांक्षा समिति फर्रूखाबाद तथा जे एस ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट बघार के संयुक्त तत्वावधान में “स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम “थीम के तहत पर्यावरण जागरूकता एवं जल संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन कियाऐ गया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गतिविधि विकासार्थ विद्यार्थी, फर्रुखाबाद स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम द्वारा थीम आधारित *हाइड्रेटिंग लाइफ : इनोवेशन इन वॉटर फॉर सस्टेनेबल डेवलेपमेंट* विषय पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन जे एस ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉक्टर शैलेंद्र यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ प्रारंभ हुआ जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन उपयोग से दूर कर उन्हें शारीरिक एवं रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना था।जिसमें जल संरक्षण, स्वच्छ जल के महत्व एवं नवाचार के माध्यम से सतत भारत निर्माण पर प्रकाश डाला गया।


कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में बढ़ता स्क्रीन टाइम युवाओं के स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। इसलिए आवश्यक है कि युवा खेल, योग, सामाजिक कार्यों एवं नवाचार गतिविधियों में अधिक समय दें।
इस अवसर अंतरराष्ट्रीय मुख्य अतिथि के नाते नेपाल देश से आए केंद्रीय प्रवासी छितराज न्यौपाने जी, कानपुर प्रांत के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री मनीष जी ने युवाओं से सतत विकास के लिए सदैव तत्पर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से आवाहन किया कि आप लोग विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं जिससे भारत विकसित भारत के सपने को यथाशीघ्र प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप नवयुग कन्या महाविद्यालय राजेंद्र नगर लखनऊ की संस्कृत विभाग की प्रोफेसर एवं आकांक्षा समिति फर्रुखाबाद की अध्यक्ष प्रो. वंदना द्विवेदी जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में जल,जंगल,जमीन,जन और जानवर के विशेष महत्व पर अपने व्याख्यान प्रकाश डाला एवं युवाओं को प्रकृति संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आने की बात की । उन्होंने कहा कि वेद कालीन मानव की पर्यावरण के साथ आत्मीयता उनकी जीवन शैली रही है प्रत्येक कार्य पर्यावरण के साथ उनके प्रगाढ़ प्रेम को प्रकट करता है पर्यावरण से उनके संबंध केवल उपभोग वादी ही नहीं थे अपितु सहयोग वादी एवं रचनात्मक भी रहे हैं इस प्रकार वैदिक मानव का पर्यावरणीय अंतर्संबंध गहराइयों तक रहा है जो आज भी अनु करणीय है समय, समाज एवं सभ्यता के परिवर्तन के उपरांत भी ऋषियों का पर्यावरणीय संबंध शाश्वत है पर्यावरणीय चिंतन शाश्वत है जिसे कोई भी चुनौती नहीं दे सकता क्योंकि यह वैश्विक कल्याण तथा ब्रह्मांड के संरक्षण की भावना से जुड़ा हुआ है।


एस डी एफ प्रमुख डॉ इंद्रेश शुक्ल जी ने( वाटर प्रबंधन)जल प्रबंधन भारत की तकनीकी और पर्यावरण प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी साथ ही राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया तथा “जल, जंगल, जमीन, जानवर” के संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया। पर्यावरणविद श्रीमती गुंजा जैन ने भी जल संरक्षण मृदा संरक्षण तथा प्लास्टिक द्वारा पर्यावरण के नुकसान पर विचार व्यक्त किया गया।इस अवसर पर आकांक्षा समिति की डॉक्टर ज्योति गुप्ता श्रद्धा दुबे साक्षी गुप्ता आदि उपस्थित रहीं
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और इस पहल को सफल बनाया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर शिवांगी यादव के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

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