
लखनऊ, राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों और पत्रकारिता पर चिंतन करते हुए कहा सवाल सीधा और तीखा है – जब सच दिखाने वाला पत्रकार ही सुरक्षित नहीं, तो लोकतंत्र की सुरक्षा का दावा कैसे किया जा सकता है?आज हालात ये हैं कि सच दिखाना सबसे बड़ा जुर्म बन गया है। ग्राउंड रिपोर्ट करने गया पत्रकार पीटा जा रहा है, कैमरा तोड़ा जा रहा है, माइक छीना जा रहा है, जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, कवरेज के दौरान घेराव किया जा रहा है। कहीं रेत माफिया, भू माफिया कहीं शराब माफिया, कहीं नेता, कहीं दबंग – सबकी आंखों में पत्रकार खटक रहा है, क्योंकि वो सवाल पूछता है
आखिर कब तक?
कब तक पत्रकार अपनी जान, अपना सम्मान, अपने परिवार की सुरक्षा को दांव पर लगाकर अपना कर्तव्य निभाता रहेगा? एक छोटा अखबार, एक ग्रामीण पत्रकार, एक यूट्यूबर – जो 200 रुपये के तेल पर 50 किलोमीटर जाकर भ्रष्टाचार उजागर करता है, उसी पर शाम को हमला होता है। और थाना कहता है – “आपस में समझौता कर लो।”
पत्रकार क्या है?
पत्रकार किसी का नौकर नहीं, किसी के दबाव में झुकने के लिए नहीं है। पत्रकार जनता के सवाल को सत्ता तक पहुंचाने वाला पुल है। उसकी रिपोर्ट से आपको असहमति हो सकती है, आप उसका जवाब तथ्यों से दीजिए, खबर का खंडन कीजिए। लेकिन असहमति का जवाब लाठी, गाली, धमकी और गुंडागर्दी से देना – ये न लोकतंत्र है, न संस्कार। ये सीधा संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।
अब बयानबाजी नहीं, कानून चाहिए!
सरकारों को अब सिर्फ हमले के बाद ट्वीट करके “निंदा करता हूं” कहने से काम नहीं चलेगा। जरूरत है एक प्रभावी, ठोस और कठोर पत्रकार सुरक्षा कानून की।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद की मांग बिल्कुल स्पष्ट और जायज है:
1. त्वरित एफआईआर और जांच: पत्रकार पर हमले, धमकी, कैमरा/उपकरण तोड़ने, कवरेज में बाधा डालने के मामलों में तुरंत एफआईआर,30 दिन में जांच पूरी।
2. कठोर दंड: दोष सिद्ध होने पर गैर-जमानती धारा, 3 से 7 साल की सजा और 50000जुर्माने का स्पष्ट प्रावधान।
3. जवाबदेही: जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी पर भी हो कार्रवाई।
4. निष्पक्षता: कानून का दुरुपयोग न हो, हर मामले की निष्पक्ष जांच हो – ग्राउंड रिपोर्टरों के लिए सुरक्षा।यह मांग किसी को विशेषाधिकार (वीआईपी) बनाने की नहीं है, यह मांग है कि पत्रकार को निर्भय होकर अपना कर्तव्य निभाने का सुरक्षित वातावरण दिया जाए।
सरकार से सीधा सवाल-
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद का सरकार से सीधा सवाल है – क्या पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए किसी पत्रकार की लाश गिरने का इंतजार किया जाएगा? क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही आंख खुलेगी? समय रहते ठोस कदम उठाइए।



