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यूजीसी के नए नियमों के विरोध में कानपुर में प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा

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कानपुर, आरोही टुडे न्यूज, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट – 
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी किए गए वर्ष 2026 के नए नियमों के विरोध में दिनांक 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को
सरसैया घाट गेट, कानपुर पर
सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति (पंजीकृत) एवं अखिल भारतीय कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासभा (पंजीकृत) और विभिन्न 24 सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने आयोग के इन नियमों को संविधान की समानता, निष्पक्ष न्याय और समता की मूल भावना के प्रतिकूल बताते हुए
इन्हें वापस लेने की मांग की। इस अवसर पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगाए जाने को
एक गंभीर संवैधानिक संकेत बताया गया।
आयोजकों ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी करते हुए नियमों के कई प्रावधानों को अस्पष्ट एवं दुरुपयोग की संभावना वाला माना है
तथा नियमों के प्रारूप को पुनः तैयार करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विषय में अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी और तब तक वर्ष 2012 के नियम ही पूरे देश में लागू रहेंगे।

प्रदर्शन के उपरांत एक प्रतिनिधिमंडल ने
जिलाधिकारी, कानपुर नगर को
माननीय प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि—
• भेदभाव की परिभाषा सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू की जाए,
• समानता से संबंधित समिति की संरचना संतुलित, समावेशी एवं निष्पक्ष बनाई जाए,
• झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाएँ,
• तथा आवश्यक संशोधन पूर्ण होने तक
इन नियमों को लागू न किया जाए।

इस अवसर पर सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति के अध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि
यह आंदोलन किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं,
बल्कि संविधान, निष्पक्ष न्याय और विश्वविद्यालय परिसरों में वास्तविक समता
के समर्थन में है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुधीर द्विवेदी ने कहा कि
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ये नए नियम
सामान्य वर्ग के साथ हो रहे भेदभाव को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कानून और नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू नहीं होंगे,
तब तक समता और न्याय केवल कागज़ों तक सीमित रहेंगे।

वहीं महेश मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि
कानपुर के सभी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठनों से यह अनुरोध है कि वे इस काले कानून के विरोध में
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 2026 के विरोध में गठित मोर्चे में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और संविधान विरोधी इस काले कानून का एकजुट होकर विरोध करें। कार्यक्रम में महेश मिश्रा, अजय कुमार द्विवेदी, सुधीर द्विवेदी, गोपाल दीक्षित, अर्जित गुप्ता, रवि शंकर तिवारी, रजत मिश्रा, आकाश ठाकुर सहित कानपुर के चौबीस अन्य संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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