
हरदोई के हरियावा क्षेत्र में एक बेकाबू सांड के हमलों ने ऐसा आतंक फैलाया कि पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
लगातार हुए हमलों में जहां लगभग 20 लोग घायल हुए, वहीं चार ग्रामीणों की दर्दनाक मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
मंगलवार की सुबह हरियावा, जतुल्ली, उतरा, कुरसेली और तिराही गांवों में अचानक सांड का व्यवहार असामान्य और अति आक्रामक हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार सांड किसी पागलपन की स्थिति में था और अनियंत्रित होकर जगह-जगह लोगों पर हमला कर रहा था।
डर के कारण लोग अपने घरों में छिप गए और गांव की सड़कों पर सन्नाटा फैल गया।
ग्रामीणों का संदेह है कि सांड को किसी पागल कुत्ते ने काटा होगा, क्योंकि उसका व्यवहार सामान्य पशु जैसा नहीं था।
हालांकि, इसकी पुष्टि संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति नियंत्रण में लेने की कोशिश करने लगीं। लेकिन सांड गांव से गांव भाग रहा था, जिससे उसे काबू में करना बेहद मुश्किल हो गया। इन लगातार हमलों में पहले दिन श्याम कुमार उर्फ मझिलू और रामदयाल की जान चली गई।
दूसरे दिन अशोक कुमार मिश्रा उर्फ नन्हे ने दम तोड़ दिया। और शुक्रवार को उपचार के दौरान आदर्श की भी मौत हो गई। चारों मौतों ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी।
ग्रामीणों का कहना है कि सांड के लगातार हमलों से बचने के लिए उन्होंने तीन ट्रैक्टर लगाकर उसे घेरने का प्रयास किया।
यह कदम उन्होंने पूरी तरह भय और आत्मरक्षा में उठाया।
घटना के बाद विभागों ने गांवों में आवारा पशुओं की जांच, टीकाकरण और गोशालाओं में पशुओं को भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पालतू पशु खुले में न छोड़े और संदिग्ध पशुओं की सूचना तुरंत दें।
हरियावा की यह त्रासदी केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है कि आवारा पशुओं की समस्या पर नियमित निगरानी और जागरूकता बेहद जरूरी है।
गांव आज एक ही सवाल पूछ रहा है—
क्या हम भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोकने के लिए तैयार हैं?


