
शमशाबाद, कायमगंज, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट – विकास खंड शमशाबाद एवं तहसील कायमगंज क्षेत्र की ग्राम सभा सुल्तानपुर के मजरा गोदाम नगला में दो दिन हुई भीषण बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव के दक्षिणी हिस्से में स्थित दो दर्जन से अधिक भवनों तक पहुंचने वाला रास्ता करीब 25 फीट गहरे तालाब में जलभराव के कारण कट गया। रास्ता कट जाने से ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन टूटकर तालाब में जा गिरी। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। आवागमन का मुख्य रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों को खेतों के बीच खड़ी नर्सरी से होकर गुजरना पड़ रहा है। बच्चों के लिए स्कूल-कॉलेज पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

एक सप्ताह बाद भी नहीं पहुंची मदद
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश बंद हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक न तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या जानने की कोशिश की और न ही सरकारी तंत्र की ओर से समस्या के स्थायी समाधान की पहल दिखाई दी। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने अपनी समस्या का वीडियो बनाकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत, फर्रुखाबाद के जिला प्रचार मंत्री राजेश गंगवार को भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया। वीडियो मिलने के बाद राजेश गंगवार गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्या को मौके पर समझा।

राजेश गंगवार ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या को प्रशासन के सामने प्रमुखता से रखा जाएगा। उन्होंने समस्त पीड़ित ग्रामीणों को 05 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे उपजिलाधिकारी कायमगंज से मुलाकात कर प्रार्थना पत्र सौंपने का समय दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल बारिश के कारण उत्पन्न नहीं हुई है, बल्कि रास्ते और तालाब की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, वे कई वर्षों से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, नेताओं और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इसके बावजूद आज तक न तो रास्ते का स्थायी समाधान हुआ और न ही तालाब की समुचित सफाई कराई गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के दक्षिणी हिस्से में आवागमन के लिए पक्के रास्ते का निर्माण कराया जाए तथा 25 फीट गहरे तालाब की सफाई एवं आवश्यक व्यवस्था कराई जाए, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों का आवागमन और बिजली सुरक्षा समेत कई गंभीर समस्याएं बनी रहेंगी।



