
फर्रुखाबाद, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट।
भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना का लाभ पात्र आलू किसानों तक पहुंचाने के लिए किसान आंदोलन के प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 करने की मांग की है। उन्होंने शीतगृह संचालकों को किसानों के आवश्यक दस्तावेज पूरे कराने की जिम्मेदारी सौंपने और अनुदान राशि समयबद्ध तरीके से किसानों के बैंक खातों में भेजने की भी मांग उठाई है।
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में अशोक कटियार ने कहा कि एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान पहचान पत्र (किसान आईडी) बनने में देरी, सर्वर की धीमी गति और तकनीकी समस्याओं के कारण अनेक पात्र किसान समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में आवेदन की अंतिम तिथि नहीं बढ़ाई गई तो बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के चलते किसानों के पास शीतगृह में आलू भंडारण से संबंधित गेट पास, किराया शुल्क की रसीद और डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) जैसे आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित नहीं हैं। इन अभिलेखों का रिकॉर्ड शीतगृह संचालकों के पास उपलब्ध रहता है। इसलिए संचालकों को निर्देशित किया जाना चाहिए कि वे किसानों के दस्तावेज पूरे कराकर उपलब्ध कराएं और जरूरत पड़ने पर पोर्टल पर अपलोड कराने में सहयोग करें।
अशोक कटियार ने यह भी कहा कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला स्तर पर सत्यापन और फाइलों के लंबित रहने से अनुदान राशि मिलने में देरी हो रही है। इससे आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे आलू किसानों की परेशानी बढ़ती है।
उन्होंने संबंधित जिला आलू विकास अधिकारी और उद्यान अधिकारियों को आवेदनों का शीघ्र सत्यापन कर निर्धारित समय-सीमा में अनुदान राशि सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भेजने के निर्देश देने की मांग की।
अशोक कटियार के अनुसार, आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने, दस्तावेजों की प्रक्रिया सरल बनाने और अनुदान भुगतान में तेजी लाने से पात्र आलू उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी तथा योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा।



