फर्रुखाबाद, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट – देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने के बीच ₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी UPI लेन-देन पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर व्यापारी संगठनों में चिंता बढ़ गई है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित MDR व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल फर्रुखाबाद जिला अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने मा० प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर व्यापारी वर्ग की चिंताओं से अवगत कराया। पत्र में कहा गया कि देश के करोड़ों व्यापारी UPI सहित डिजिटल भुगतान व्यवस्था को पूरी निष्ठा के साथ अपना चुके हैं। UPI ने छोटे दुकानदारों, किराना व्यापारियों, फुटकर विक्रेताओं, स्ट्रीट वेंडरों तथा अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भुगतान प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ईमेल के माध्यम से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के निर्धारित Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने की प्रस्तावित व्यवस्था व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है। पत्र में ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर ₹300 प्रति लेन-देन की अधिकतम सीमा का भी उल्लेख किया –
मनोज मिश्रा ने कहा कि भले ही यह स्पष्ट किया गया हो कि प्रस्तावित शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा और अधिकांश छोटे UPI लेन-देन शुल्क-मुक्त रहेंगे, लेकिन व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ना चिंता का विषय है। विशेष रूप से कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए प्रत्येक लेन-देन पर लगने वाला शुल्क उनके व्यापारिक लाभ को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग पहले से ही GST अनुपालन, ई-वे बिल, ई-इनवॉइस, बैंकिंग शुल्क, महंगाई, बिजली और अन्य बढ़ती परिचालन लागतों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त आर्थिक भार व्यापारियों की लागत को और बढ़ा सकता है।
मनोज मिश्रा ने कहा कि देश का व्यापारी वर्ग सरकार की डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था की पहल का महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को अपनाकर ग्राहकों को सुविधाजनक और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था उपलब्ध कराई है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत लगाए जाने से व्यापारियों की लागत बढ़ने की आशंका है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR व्यवस्था को वापस लिया जाए और UPI को व्यापारियों तथा आम नागरिकों के लिए शून्य MDR व्यवस्था के अंतर्गत जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि छोटे, मध्यम और बड़े सभी व्यापारियों को डिजिटल भुगतान की अतिरिक्त लागत से मुक्त रखा जाना चाहिए तथा UPI के तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा एवं परिचालन खर्चों के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त भार डालने के बजाय वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री जी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री जी से अपील की कि व्यापारी हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर शीघ्र पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लेने की घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि देश के व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भविष्य में भी डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
मनोज मिश्रा
जिला अध्यक्ष
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल फर्रुखाबाद


