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जीवीए ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को किया गया सम्मानित

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फर्रुखाबाद, आलोक शुक्ला की रिपोर्ट – बढ़पुर स्थित जीवीए ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में स्व० डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर उनको नमन करते हुए शिक्षक दिवस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया,इस कार्यक्रम में एक गुरु की महत्ता और शिक्षकों के द्वारा समाज में दिए जाने वाले योगदान को नमन करते हुए अपने छात्रों में सामाजिक सुधार और नैतिक मूल्यों का समावेश करना गुरु के परम कर्तव्य को बताया गया, कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शिक्षिका श्रीमती भारती मिश्रा रहीं,सर्वप्रथम उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा पर एवं डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, उन्होंने बच्चों को जागरूक करते हुए कहा कि हम विभिन्न सभाओं और कार्यक्रमों में जाते हैं और बहुत से लोग जन हमें शिक्षा और ज्ञान देते हैं परन्तु हमें आज के समय में अपने तीसरे नेत्र अर्थात ज्ञान के नेत्र अर्थात आज्ञा चक्र जिसे पीनियल ग्रंथि कहते हैं उसको खोलने की आवश्यकता है और वर्तमान की विषम परिस्थितियों में हमें हमारी तीसरी आंख से सोचने और समझने के लिए निर्णय लेना चाहिए,और उन्होंने कहा कि अब “काक चेष्टा बकोध्यानं” जैसे श्लोक का भी कहीं पालन होते हुए बहुत कम मिलता है,इसलिए आप को सफलता प्राप्त करनी है तो स्वयं की बात को सोचने और समझने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।


कार्यक्रम में डॉ० मनोज चतुर्वेदी ने भी अपने विचारों के माध्यम से छात्रों को संबोधित किया उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है आज की गुरु शिष्य परंपरा का पूर्ण निर्वहन न होना कहीं न कहीं वास्तविक शिक्षा का ही अभाव है उन्होंने कहा कि शिक्षा के स्तर को परिवर्तित कर दिया गया मूल रूप से शिखा विद्यालय केंद्रित एवं शिक्षक केंद्रित व विद्यार्थी केंद्रित होनी चाहिए,कुछ ऐसे वे वजह बदलाव जिए जाना सर्वथा गलत है जिनकी वजह से शिक्षा पद्धति प्रभावित हुई है,कार्यक्रम में शिक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने अपने विचार रखे,साथ ही पूर्व अध्यापिका सर्वेश शाक्या ने अपने द्वारा समाज में कर रहे कार्यों को बताया जिससे आज की युवा पीढ़ी को कहीं न कहीं सोचने और समझने की क्षमता को बढ़ाने का कार्य कर रही हैं,इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक मानवाधिकार से आदित्य दीक्षित ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक को कभी जाति विशेष में नहीं बांटना चाहिए गुरु की कोई जाति नहीं होती है ,शिक्षक किसी भी जाति का हो सभी वंदनीय होते हैं। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के एक वर्ष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद छात्र छात्राओं को प्रमाण पत्र वितरण किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से श्रीमती भारती मिश्रा, डॉ० मनोज चतुर्वेदी,आदित्य दीक्षित,ज्ञानेंद्र सिंह,श्रीमती सर्वेश शाक्या,रवि बाजपेई,शिल्पी सक्सेना,अंशिका यादव,सत्यम सिंह, सहित आदि उपस्थित रहे एवं आए हुए शिक्षकों एवं अतिथियों का सम्मान संस्थापक विपिन अवस्थी एड० ने किया कार्यक्रम का सफल संचालन वैभव सोमवंशी ने किया।

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